हिंदी कहानी || हमारे नए स्वदेशी सुपर हीरो की कहानी || जेटमैन:-अ न्यू इंडियन सुपर हीरो भाग-1 || जानिए एक आम व्यक्ति कैसे बना एक सुपर हीरो! || Hindi Story || हिंदी सस्पेंस/थ्रिलर कहानी || Hindi Thriller Story
कहानी के बारे में:-यह कहानी हमारे नए स्वदेशी सुपर हीरो की कहानी है जिसका नाम हैं: जेटमैन| इस धारावाहिक में हम जानेंगे कि जेटमैन किस प्रकार जेट प्लेन की तरह जाकर मुश्किल में फंसे लोगों की मदद करता है| हम इसमें यह भी देखेंगे की जेटमैन पहले केसा था व बाद में कैसा हो गया| यह कहानी सस्पेंस, एक्शन व रोमांच से भरी है|
तो चलिए शुरू करते हैं इस कहानी को.........
बोतल का रहस्य (भाग 1)
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| बोतल का रहस्य |
यह बात नवरंगपुर गांव की है| वह गांव जो अपनी प्राचीन संस्कृति के लिए अपने आप में सुप्रसिद्ध है|
गर्मी की छुट्टियों के दिन थे| जग्गू ,जो कि एक बड़ा गरीब बच्चा था |उसके घर की आर्थिक स्थिति ठीक न थी |उसके पिता की कुछ वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी थी|
वह अपनी मां के साथ अपने घर में रहता था| उसके घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उसे पढ़ाने -लिखाने में उसकी मां को बड़ी तकलीफ आती थी| वे अत्यधिक गरीब थे|
एक दिन उसकी मां उसे अपने घर पर अपने साथ बिठाकर एक कहानी सुना रही थी| वह कहानी थी, उसके उस सुप्रसिद्ध गांव की ,जो अपनी ही संस्कृति में रमा हुआ था|
उसकी मां ने कहा:
"बेटा हमारा गांव आसपास के कई गांवों ,शहरों व कई अन्य जगहों पर सुप्रसिद्ध है|
यहां के राजा महाराज नवदेव सिंह ने यहां की खूब प्रगति की थी| उनके शासन काल में हमारा गांव बहुत समृद्ध था|लेकिन जब भारत में अंग्रेजों का शासन चलने लगा| तब महाराज को लगा कि अब उनके बाद उनका कोई योग्य उत्तराधिकारी न होगा इसलिए उन्होंने अपना खजाना गांव के बाहर वाले जंगल की एक घनी गुफा में छिपा दिया और उस गुफा तक जाने के रास्ते का नक्शा बनवा लिया|
किसी प्रकार पड़ोसी राज्य के क्रूर व लालची राजा को इसका पता चल गया कि महाराज ने अपना बहुत सारा खजाना उस गुफा में छुपा दिया है तो वह खजाने को लूटने के लिए निकल पड़ा|
महाराज को इस बात की शंका हो गई कि वह राजा खजाना हड़पना चाहता है |अच्छी बात तो यह थी कि उस राजा को यह नहीं पता था कि महाराज ने खजाना कहां व किस गुफा में छुपाया है|
उसे महाराज द्वारा बनवाए गए उस नक्शे की आवश्यकता थी जो उसे गुफा तक पहुंचाने का एकमात्र चारा था|
फिर क्या था, वह कई बार अपने सैनिकों को भेजने लगा और वे सैनिक कई बार महल में घुसकर उस नक्शे को चुराने आए परंतु उन्हें सफलता न मिली|
कई बार तो उस राजा के कई सैनिक चोरी करने आए हुए रंगे हाथों पकड़े गए |जिससे महाराज को विश्वास हो गया कि पड़ोसी देश का राजा उस खजाने को हड़पना चाहता है |उन्होंने उस नक्शे की रक्षा और कड़ी कर दी|
एक दिन वह लालची राजा अपनी पूरी सेना लेकर हमारे गांव की तरफ बढ़ने लगा |इधर से महाराज भी उसकी ओर बढ़ने लगे |उस दिन दोनों पक्षों के बीच घमासान युद्ध छिड़ गया| महाराज ने उस राजा को मार दिया|
सभी लोग अपनी जीत की खुशी मना रहे थे| परंतु महाराज को पता था कि उनके अंतिम दिन आ गए हैं | वे अब ज्यादा दिन के मेहमान ना रहे इसलिए उन्होंने उस नक्शे को एक बोतल में बंद कर के हमारे गांव के पास वाली नदी में फेंक दिया|
उसके बाद से कोई उस बोतल को ना खोज पाया| कहते हैं महाराज ने लगभग एक कक्ष भरकर स्वर्ण मुद्राएं वहां रखी थी यह बात बहुत कम लोग जानते हैं क्योंकि काल के फेरबदल में यह कथा अब इतनी प्रसिद्ध नहीं रही|
कुछ लोग तो इस कथा पर विश्वास करते हैं और कुछ इसे झूठा मानकर इस पर कोई ध्यान नहीं देते|"
जग्गू ने मां से पूछा:
" मां क्या वहां नदी हमारे स्कूल के पीछे वाली नदी है|"
मां ने उससे कहा:
"हां बेटा यह वही नदी है जो तेरी स्कूल के पीछे है|"
जग्गू ने कहा:" वाह! मां यह कहानी तो बड़ी दिलचस्प थी|"
मां ने कहा" हां बेटा यह कहानी दिलचस्प तो है |परंतु इसकी सत्यता पर शंका है | अभी तो तू खेलने जा तेरे मित्र तेरी राह देख रहे होंगे|"
जग्गू ने कहा" ठीक है मां में जाता हूं|"
मां ने कहा:" हां और सुन शाम को जल्दी घर लौट जाना|
जग्गू बोला:" ठीक है मां|"
जग्गू अपने घर से निकल पड़ा और अपने दोस्तों की ओर चल दिया वह कुछ ही देर में पहुंच गया उसके कुछ दोस्त वहीं पर थे और कुछ अभी तक आए नहीं थे इसलिए सभी खेल की तैयारियां कर रहे थे जग्गू एक कोने में अकेला बैठकर विचार कर रहा था
वह सोच रहा था:
मां द्वारा सुनाई गई वह कथा कोई झूठी नहीं प्रतीत होती| मुझे वह सत्य घटना सत्य लगती जो मां द्वारा बताइ गई है |अगर मुझे उस खजाने में से थोड़ा भी मिल गया तो मेरी गरीबी मिट जाएगी मैं अच्छी तरह भविष्य में भी पढ़ पाऊंगा| क्यों ना मैं उस नदी में जाकर उस बोतल की खोज करूं?
उसने मन ही मन विचार किया कि वह अगले दिन सुबह से ही नदी की ओर निकल पड़ेगा और उस बोतल की खोज करेगा|
कुछ ही देर में उसके दोस्तों ने खेल शुरू कर दिया और वह भी खेलने चला गया| उसने जी भर कर अच्छे से खेला और शाम होते ही समय से अपने घर चला गया|
वह बार-बार उस बोतल वाली बात को सोचकर मन ही मन खुश हो रहा था |उसे खुशी थी कि उसकी गरीबी अब ज्यादा समय तक नहीं रहेगी|
उसने घर आकर बड़े आनंद से भोजन किया और खुशी-खुशी सो गया|
सुबह होते ही उसने मां से बोला:" मां मेरे मित्र कह रहे थे कि आज हम रोज से थोड़ी ज्यादा देर तक खेलेंगे| इसलिए क्या मैं अभी से खेलने जा सकता हूं| मेरे सभी मित्र मेरी प्रतीक्षा कर रहे होंगे|"
मां ने कहा :"हां बेटा जा शाम को समय से घर आ जाना और ज्यादा कुछ शरारत मत करना|"
जग्गू घर पर खेलने जाने का कह कर अकेला ही नदी के मार्ग पर निकल पड़ा| वह कुछ ही देर में उसके स्कूल के पीछे वाली नदी के पास जाकर खड़ा हो गया|
थोड़ी देर विचार करने के बाद वह नदी में उस बोतल को खोजने लगा वह बड़ा उत्साहित था और मन में एक विश्वास था कि आज वह बोतल को खोज कर ही घर जाएगा|
वह बहुत घंटों तक खोजता रहा परंतु उसे बोतल नहीं मिली |अब वह थक चुका था| उसे विश्राम की आवश्यकता थी|इसलिए वह कुछ देर विश्राम का विचार कर के नदी के किनारे की ओर बढ़ने लगा|
तभी नदी के किनारे की ओर आते हुए उसने सोचा : क्यों ना में किनारे पर जाते हुए बोतल खोजता जाऊं| उसने अपने नीचे वाली जगह पर देखा तो वहां पर एक बोतल रखी हुई थी |उसने उस बोतल को उठा लिया|
वह बहुत खुश हो गया था|अब उसने सोचा कि उसका आज का लक्ष्य उसे मिल गया है जो कि उसे बहुत लाभ करेगा|
इसके साथ ही वह नदी के तट की ओर बढ़ा|वह जल्दी से नदी से बाहर निकला|
बाहर निकल कर उसने उस बोतल को ठीक से देखा| वह बहुत खुश था| फिर उसने अपने दिल को थमते हुए उस बोतल को खोला| उस बोतल से जो निकला उसे देख कर जग्गू डर गया|
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