नमस्कार दोस्तों मै हूँ
सुधीर पाटीदार और आप सभी का साहित्य ट्यूबर{Sahitya Tuber}में स्वागत है| दोस्तों आज मै आप लोगो को हमारे देश के लोह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी के बारे मई कुछ ऐसी अनसुनी बाते बताने वाला हूँ
हिन्हे जानकर आप हक्का-बक्का रह जाएंगे|
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| Sardar Vallabh Bhai Patel |
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| Sardar Vallabh Bhai Patel |
लोह्पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल साहब के बारे में हैरान कर देने वाली बाते || Sardar Vallabh Bhai Patel
सरदार वल्लभ भाई पटेल-परिचय
सरदार वल्लभ भाई पटेल भारत
के लोह पुरुष के नाम से भी जाने जाते है | वे एक सच्चे देशभक्त थे | सरदार पटेल एक भारतीय
राजनीतिज्ञ थे।वे एक वकील और राजनेता थे |उन्होंने भारत की
स्वतंत्रता में भी अपनी अद्वितीय भूमिका निभाई || उन्होंने महात्मा गाँधी के साथ कई
आन्दोलनों में देश को आजाद करवाने के बहुत प्रयाष किये || वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता थे |उन्होंने एक एकीकृत, स्वतंत्र राष्ट्र
में अपने एकीकरण का मार्गदर्शन किया। उन्हें अक्सर हिंदी,
उर्दू और फ़ारसी में सरदार कहा जाता था,
जिसका अर्थ है "प्रमुख"। उन्होंने भारत के राजनीतिक एकीकरण और 1947
के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान गृह मंत्री के रूप में कार्य
किया।
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| Sardar Vallabh Bhai Patel |
सरदार वल्लभ भाई पटेल -जन्म
सरदार वल्लभ भाई
पटेल का जन्म ३१ अक्टूबर १८७५ { 31-October-1875} को नडियाद, गुजरात में एक लेवा पटेल(पाटीदार) जाति में हुआ था।
वे झवेरभाई पटेल एवं लाडबा देवी की चौथी संतान थे। सोमाभाई, नरसीभाई और विट्टलभाई उनसे बड़े थे। उनका नाम शुरुआत मई वल्लभ भाई पटेल था | बाद में
लोग उन्हें सरदार कहकर पुकारने लगे |
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| Sardar Vallabh Bhai Patel |
सरदार वल्लभ भाई पटेल-शिक्षा
उनकी शिक्षा
मुख्यतः स्वाध्याय से ही पूरी हुई। लन्दन जाकर उन्होंने बैरिस्टर की पढाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे।
सरदार वल्लभ भाई पटेल-स्वंत्रता की और अग्रसर
महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होने भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में भाग लिया। स्वतन्त्रता आन्दोलन में सरदार पटेल का सबसे पहला और बड़ा योगदान 1918 में खेडा संघर्षमें हुआ। गुजरात का खेडा उन दिनों भयंकर सूखे की चपेट में था। किसानों ने अंग्रेज सरकार से भारी कर में छूट की मांग की। जब अंग्रजो यह स्वीकार नहीं किया गया तो सरदार पटेल, गांधीजी एवं अन्य लोगों ने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हे कर न देने के लिये प्रेरित किया। अन्त में सरकार झुकी और उस वर्ष किशानो को करो मे रहत प्रदान की गई| यह सरदार पटेल की पहली सफलता थी। उन्होंने इसके बाद बारडोली सत्याग्रह का नेतृत्व किया |यह भारतीय स्वाधीनता संग्राम के दौरान वर्ष 1928 में गुजरात में हुआ एक प्रमुख किसान आंदोलन था, जिसका नेतृत्व वल्लभभाई पटेल ने किया । इसके बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कई अन्दालो में देश की आजादी के लिए अद्वितीय संघर्ष किया ||
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| Statue Of Unity |
सरदार वल्लभ भाई पटेल-हैरान कर देने वाली बाते
उनके बचपन का एक किस्सा
विधार्थियों की एक टोली रोज पड़ने के लिए अपने गाँव से छः-सात मिल दूर चलकर जाती थी | हर दिन की तरह वे विद्यार्थी जा रहे थे| उस दिन आगे जाते-जाते उन्हें ऐसा लगा की उनमे से उनका एक साथी कम है | जब उन्होंने उसे खोजा तो पता चला की वह पीछे रह गया है| वह पीछे ही रुक गया था | उसे रुका देख टोली में से एक बच्चे ने उसे आवाज लगाई-“अरे तुम वहां क्या कर रहे हो? |” उस पीछे रह गए बच्चे ने कहा-“रुको में आ रहा हूँ |"यह कहकर उसने धरती में गड़े एक खूंटे को पकड़ा, जोर से हिलाया और उखाड़ कर फेक दिया | उसके बाद वह संतुस्ट होकर अपनी टोली में फिर से आ गया | फिर उस टोली में से उसके एक साथी ने उससे पूछा-“तुमने उस खूंटे को क्यों उखाड़ा? उसे तो किसी ने अपने खेत की बाउंड्री के लिए गढ़ा था|" इस पर उस बच्चे ने बोला-" लेकिन वह खूंटा रस्ते में बाधा डाल रहा था और जो खूंटा रास्ते की बाधा बने उसे उखाड़ फेकना चाहिए |" वह बालक और कोई नहीं बल्कि हमारे देश के पहले उप-प्रधानमंत्री एवं गृह-मंत्री श्री सरदार वल्लभ भाईपटेल थे |
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| Sardar Vallabh Bhai Patel |
जब उनकी पत्नी की मृत्यु हुई
एक बार कोर्ट में एक वकील कुछ बेगुनाह लोगो के लिए केस लड़
रहे थे जिन्हें अंग्रेजो ने फांसी की सजा सुना दी थी| कोर्ट की कार्यवाहीं के बिच
एक कर्मचारी उनके पास एक ख़त लेकर आया | उन्होंने वह ख़त पढ़ कर ज़ेब में रख लिया और
अपनी बहस जरी रखी | अंत में सारे लोग बेगुनाह लोग फासी से बच गये और उन वकील साहब
ने केस जीत लिया | अंत में जब जज साहब ने और अन्य लोगो ने उन्हें पूछा की उस पत्र
मई क्या लिखा था तो उन्होंने कहा कि-“इसमें मेरी पत्नी की मृत्यु का सन्देश था|”
इस पर सभी ने हैरान होकर उनसे पूछा कि-“तुम्हारी पत्नी की मृत्यु हो गई तो तुम घर
क्यों नहीं गए|” इस पर वकील ने कहा-“मेरी पत्नी की तो मृत्यु हो गयी उसे तो मै चाह
कर भी नहीं ला सकता,परन्तु अगर में घर चला जाता तो इन बेगुनाह लोगो को सजा मिल
जाती और ये बेवजह मारे जाते|” इस बार भी यह वकील और कोई नहीं बल्कि सरदार वल्लभभाई पटेल साहब थे | यह बात कही-न-कही यह चीख-चीख के कहती है की सरदार वल्लभ भाईपटेल लोह पुरुष क्यों थे |
जब सरदार वल्लभ भाई पटेल ने प्रधानमंत्री पद के लिए मना कर
दिया
कांग्रेस के कई सदस्यों व अधिकांश लोगो की यह राइ थी कीसरदार वल्लभ भाई भारत के पहले प्रधानमंत्री बने | परन्तु महात्मा गाँधी जवाहर लाल
नेहरु को प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे | सरदार पटेल महात्मा गाँधी का बहुत आदर-सम्मान
करते थे | इस लिए उन्होंने भारत के प्रधान मंत्री बनने से इनकार कर दिया और जवाहर
लाल नेहरु को प्रधानमंत्री बनाने के पक्ष में अपनी राय दी|
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| सरदार पटेल गांधीजी व नेहरूजी के साथ |
सरदार पटेल ने भारत की लगभग 562 देशी रियासतों को एक किया
सन् 1947 में स्वतंत्र होने के बाद भारत स्वतंत्र रियासतों में बंटा हुआ था। सरदार पटेल ने लगभग 562 देशी रियासतों
को भारत में मिलाकर भारत को एक सूत्र में बांधा और भारत को मौजूदा स्वरूप दिया। एक
कुशल प्रशासक होने के कारण कृतज्ञ राष्ट्र उन्हें ’लौह पुरुष‘ के रूप में भी याद
करता है|
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| Sardar Vallabh Bhai Patel |
सरदार वल्लभ भाई पटेल ने हमारे देश की लिए बहुत कुछ किया | हमारा देश जो कई
रियासतों में बंटा था उन्हें एक साथ जोड़ कर एक अखंड भारत का निर्माण किया | उन्हे
अखंड भारत का निर्माता व अखंड भारत का शिल्पकार भी कहा जाता है | सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे महा पुरुष सदियों में ही
पैदा होते है जो पुरे रास्ट्रको गोरवान्वित कर देते है |
पाईए हमारी वीडियोस Youtube पर --------Sudhir-The Sahitya Tuber









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